स्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से बदलेगा हवाओं का रुख; जानें अगले 10 दिनों में आपके राज्य में कैसा रहेगा मौसम
पूरे भारत में इस समय मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बर्फीली हवाओं के कारण तापमान शून्य के करीब पहुंच गया है, वहीं दक्षिण भारत में मानसून की वापसी अंतिम चरण में है। स्काईमेट वेदर के अनुसार, अगले कुछ दिनों में एक शक्तिशाली वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भारत के मौसम को पूरी तरह बदलने वाला है। उत्तर भारत के कई राज्यों में भीषण ठंड से कुछ समय के लिए राहत मिलेगी, लेकिन जनवरी के अंत में कड़ाके की सर्दी एक बार फिर लौटकर आएगी।
मैदानी राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ ठंड और शीतलहर
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इस समय भीषण शीतलहर का प्रकोप है। राजस्थान के सीकर और अलवर में न्यूनतम तापमान 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जबकि हरियाणा के हिसार में यह 0.2 डिग्री तक गिर गया है। दिल्ली के पालम में न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है, जो इस सीजन की सबसे ठंडी सुबह रही। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में फिलहाल कोहरा कम हुआ है, लेकिन ठंडी हवाओं के कारण कनकनी बरकरार है। 16 जनवरी तक ये बर्फीली हवाएं जारी रहेंगी, जिससे जनजीवन प्रभावित होगा।
पहाड़ों पर अभूतपूर्व बर्फबारी और भूस्खलन की चेतावनी
पहाड़ी राज्यों के लिए अगले 10 दिन काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। 16 जनवरी से हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू होगा जो 25 जनवरी तक रुक-रुक कर चलता रहेगा। विशेष रूप से 22, 23 और 24 जनवरी को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अभूतपूर्व और भारी बर्फबारी (Intense Snowfall) होने की संभावना है। भारी हिमपात के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो सकता है और भूस्खलन (Landslides) का खतरा बढ़ सकता है। पर्यटकों को इन तारीखों पर पहाड़ों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
मध्य और पश्चिम भारत में बारिश का पूर्वानुमान
वेस्टर्न डिस्टरबेंस और अरब सागर से उठने वाली नमी के कारण राजस्थान के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation) बनेगा। इसके प्रभाव से 23 और 24 जनवरी को राजस्थान, पंजाब, हरियाणा के साथ-साथ गुजरात के कुछ हिस्सों, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के इलाकों में बारिश होने की संभावना है। 18 जनवरी के आसपास दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी हल्की बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जिससे तापमान में बदलाव आएगा।
हवाओं का रुख बदलने से मिलेगी अस्थायी राहत
17 और 18 जनवरी से उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं का चलना बंद हो जाएगा और उनकी जगह दक्षिण-पूर्वी गर्म और नमी वाली हवाएं ले लेंगी। इसके परिणामस्वरूप न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी होगी और भीषण ठंड से कुछ राहत मिलेगी। दिल्ली, राजस्थान और मध्य भारत के तापमान जो शून्य के करीब थे, वे बढ़ने लगेंगे। हालांकि, यह राहत केवल 25 जनवरी तक ही रहेगी, क्योंकि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के हटते ही मौसम फिर से करवट लेगा।
गणतंत्र दिवस के बाद फिर लौटेगी कड़ाके की सर्दी
26 जनवरी के बाद जैसे ही वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर खत्म होगा, पहाड़ों पर जमी ताजी बर्फ से होकर आने वाली बर्फीली हवाएं एक बार फिर मैदानी इलाकों का रुख करेंगी। इससे जनवरी के आखिरी दिनों में कड़ाके की सर्दी का दूसरा दौर शुरू होगा। तापमान में फिर से भारी गिरावट आएगी और ठिठुरन वाली सर्दी लोगों को परेशान करेगी। किसानों और नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे जनवरी के अंत में आने वाली इस शीतलहर के लिए पहले से ही कमर कस लें।

