रियल एस्टेट सेक्टर की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बड़ी मांगें; होम लोन पर टैक्स डिडक्शन सीमा बढ़ाने पर टिकी नजरें
केंद्रीय बजट 2026 की आहट के साथ ही देश के रियल एस्टेट बाजार में नई हलचल शुरू हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में महामारी, वैश्विक मंदी और ऊंची ब्याज दरों जैसी चुनौतियों का सामना करने के बाद अब यह सेक्टर फिर से पटरी पर लौट रहा है। ऐसे में आम जनता, विशेषकर मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हैं। लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या इस बार के बजट में घर खरीदना आसान होगा और ईएमआई (EMI) का बोझ कुछ कम होगा।
होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की मांग
महानगरों में प्रॉपर्टी की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में 30% से 40% तक बढ़ गई हैं, जिससे होम लोन लेना अब पहले जितना आसान नहीं रहा। वर्तमान में, आयकर अधिनियम की धारा 24(बी) के तहत स्व-अधिकृत संपत्ति (Self-occupied property) के होम लोन ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा ₹2 लाख तक सीमित है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि घर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम ₹3 से ₹5 लाख किया जाना चाहिए। टैक्स छूट बढ़ने से खरीदारों की नेट इनकम में सुधार होगा और लोन चुकाना आसान लगेगा।
धारा 80C के तहत प्रिंसिपल अमाउंट के लिए अलग स्लैब की आवश्यकता
होम लोन की ईएमआई का दूसरा हिस्सा ‘प्रिंसिपल अमाउंट’ (मूलधन) होता है, जो धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख की सीमा में आता है। इसी सीमा के भीतर पीएफ, इंश्योरेंस और बच्चों की फीस जैसे अन्य खर्च भी शामिल होते हैं, जिससे होम लोन के मूलधन पर मिलने वाली राहत दब जाती है। इसलिए, बजट 2026 से एक प्रमुख मांग यह उठ रही है कि होम लोन के मूलधन के भुगतान के लिए एक अलग से डिडक्शन स्लैब बनाया जाए, ताकि घर खरीदारों को वास्तविक वित्तीय लाभ मिल सके।
छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) में रियल एस्टेट को बढ़ावा
अब रियल एस्टेट की कहानी केवल दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं रही है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘वर्क फ्रॉम होम’ कल्चर के कारण छोटे शहर निवेश के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। डेवलपर्स को उम्मीद है कि बजट 2026 में टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए टैक्स इंसेंटिव, आसान फंडिंग और बेहतर कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे ‘रिवर्स माइग्रेशन’ को मजबूती मिलेगी और लोग अपने गृहनगर में घर खरीदने के सपने को साकार कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की सब्सिडी की वापसी
मध्यम आय वर्ग के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की ‘क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम’ (CLSS) एक बड़ा सहारा थी, जिससे ब्याज दरों में सीधी छूट मिलती थी। बजट 2026 से एक बार फिर यह मांग उठ रही है कि इस स्कीम को नए रूप में दोबारा शुरू किया जाए। खासकर छोटे शहरों में हाउसिंग डिमांड को रफ्तार देने के लिए यह कदम गेम चेंजर साबित हो सकता है। यदि सरकार सब्सिडी और सस्ती फंडिंग पर ठोस फैसले लेती है, तो मिडिल क्लास के लिए सपनों का घर खरीदना अब हकीकत बन सकता है।