स्नान, दान और सूर्य उपासना का महापर्व; शनि देव की कृपा से खुलेंगे सफलता के द्वार
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के पर्व को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह त्यौहार उस विशेष खगोलीय घटना का प्रतीक है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि, मकर में प्रवेश करते हैं। इस साल सूर्य का यह गोचर बुधवार, 14 जनवरी 2026 को होने जा रहा है, इसलिए पूरे देश में इसी दिन मकर संक्रांति का उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और सूर्य देव के साथ-साथ मां गंगा की विधि-विधान से पूजा करने की प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि संक्रांति के दिन किया गया दान और तप अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराता है।
मेष राशि: नए अवसरों और सकारात्मक ऊर्जा का संचार
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस बार की मकर संक्रांति मेष राशि के जातकों के लिए बड़े बदलाव लेकर आने वाली है। शनि देव की विशेष कृपा से इन जातकों का मन प्रसन्न रहेगा और जीवन में सकारात्मकता आएगी। निवेश और भविष्य की योजनाओं के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। आय के नए स्रोत खुलने की प्रबल संभावना है, हालांकि क्रोध पर नियंत्रण और वाणी में मधुरता रखना आवश्यक होगा। इस शुभ अवसर पर काले रंग की वस्तुओं का दान करना मेष राशि वालों के लिए विशेष फलदायी रहेगा।
तुला राशि: आर्थिक लाभ और पारिवारिक सुख का योग
तुला राशि के जातकों के लिए 14 जनवरी का दिन खुशियों की सौगात लेकर आएगा। इस दौरान धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं और पारिवारिक सहयोग से आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता मिल सकती है। जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति के संकेत मिल सकते हैं। इस दिन तुला राशि वालों को काले तिल को कच्चे दूध या गंगाजल में मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए, इससे भाग्य का साथ और अधिक मजबूत होगा।
कुंभ राशि: करियर में स्थिरता और कष्टों से मुक्ति
कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए मकर संक्रांति पर सूर्य का गोचर इनके लिए नई संभावनाएं लेकर आएगा। लंबे समय से अटके हुए कार्य अब गति पकड़ेंगे और करियर के साथ-साथ निजी जीवन में भी स्थिरता आएगी। शनि देव की कृपा दृष्टि से जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगेंगी और शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी। कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय आध्यात्मिक साधना और भविष्य के महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए सर्वथा अनुकूल है।
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व और सूर्य उपासना
मकर संक्रांति केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि नए उत्साह और नई शुरुआत का संकल्प लेने का दिन है। सूर्य देव की आराधना से न केवल शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि स्वास्थ्य और दीर्घायु का वरदान भी मिलता है। लोग सूर्योदय से पहले स्नान कर अंधकार को दूर करने और प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रार्थना करते हैं। इस दिन समाज में सेवा और दान के कार्यों से सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है, जो व्यक्तिगत शांति और सामाजिक समरसता के लिए अनिवार्य माना गया है।