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मौसम अपडेट: पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का अलर्ट; कड़ाके की
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उत्तर भारत में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी, पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानों में बारिश का
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कड़ाके की ठंड और शीतलहर की चपेट में उत्तर भारत: डल झील जमी, शून्य डिग्री तक पहुंचा पारा

हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की कमी के बावजूद मैदानी इलाकों में भीषण ठंड; जानें अगले 10 दिनों का मौसम पूर्वानुमान

उत्तर भारत इस समय भीषण विंटर सीजन और ‘कोल्ड वेव’ (शीतलहर) के सबसे लंबे स्पैल का सामना कर रहा है। स्काईमेट के मेटोलॉजी एंड क्लाइमेट चेंज प्रेसिडेंट, एयर वाइस मार्शल जीपी शर्मा के अनुसार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कई हिस्सों में ‘कोल्ड वेव’ और ‘कोल्ड डे’ की स्थिति बनी हुई है। पहाड़ों में बर्फबारी की कमी के बावजूद, प्रोग्रेसिव तापमान गिरने के कारण श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील पूरी तरह से जम गई है। श्रीनगर का न्यूनतम तापमान -6 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है, जिससे झील के ऊपर बर्फ की एक मोटी परत जमा हो गई है।

मैदानी इलाकों में शून्य डिग्री का रिकॉर्ड

पंजाब के एसपीएस नगर स्थित बालवाल सौकरी में इस सीजन में पहली बार मैदानी इलाकों का न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा, हिसार में 0.5 डिग्री, भटिंडा में 0.6 डिग्री और राजस्थान के फलौदी में 0.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। दिल्ली में भी पिछले तीन दिनों से तापमान 4 डिग्री से कम बना हुआ है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

क्या है ‘कोल्ड वेव’ और ‘कोल्ड डे’ का गणित?

मौसम विभाग के अनुसार, जब मैदानी इलाकों में तापमान 4 डिग्री या उससे कम हो जाता है, तो उसे ‘कोल्ड वेव’ कहा जाता है। वहीं ‘कोल्ड डे’ की स्थिति तब बनती है जब घने कोहरे (Dense Fog) के कारण सूर्य की किरणें जमीन तक नहीं पहुंच पातीं और दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 4.4 डिग्री या उससे अधिक कम रहता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में ‘कोल्ड डे’ की स्थिति बनी हुई है, जबकि उत्तर भारत में ‘कोल्ड वेव’ का प्रकोप अधिक है।

बर्फबारी और वर्षा का भारी संकट

इस साल विंटर रेनफॉल और स्नोफॉल में भारी गिरावट देखी गई है। दिसंबर महीने में उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में 90% से 100% तक बारिश की कमी रही। उत्तराखंड में तो 100% बारिश की कमी दर्ज की गई है। जनवरी के पहले पखवाड़े में भी यही स्थिति बनी हुई है, जिससे शुष्क ठंड (Dry Cold) बढ़ गई है। इसका सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है, क्योंकि नमी की कमी और पाला (Frost) फसलों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

अगले 10 दिनों का पूर्वानुमान: राहत या और आफत?

राहत की बात यह है कि अगले 48 घंटों में शीतलहर का प्रभाव थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि, 16 से 18 जनवरी के बीच एक ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) हिमालयी क्षेत्रों में दस्तक देगा, जिससे ऊपरी इलाकों में हल्की बर्फबारी और बारिश की संभावना है। असली बदलाव 19 जनवरी के बाद आएगा, जब एक अधिक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित करेगा। इसके कारण 22 से 25 जनवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बर्फबारी हो सकती है, जिसका असर मैदानी इलाकों में बारिश के रूप में दिखेगा।

गणतंत्र दिवस पर मौसम का साया

भारी बर्फबारी और बारिश के इस स्पैल के कारण 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के समारोहों पर भी मौसम का असर पड़ सकता है। यदि 23-24 जनवरी को दिल्ली और आसपास के इलाकों में बारिश होती है, तो परेड के समय ठंड और नमी बढ़ सकती है। हालांकि, लंबी अवधि के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है, इसलिए अगले सप्ताह की सटीक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

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